लौंग एक फायदें अनेक, स्वाद का रस, सुगंध एवं स्वास्थ्य की श्रीवृद्धि के लिए है एक जादुई कली | Clove a magical bud for various health cure and aromatic food

लौंग

परिचय

लौंग का नाम सुनते ही मन ही मन में ऐसा अनुभव होने लगता है कि जैसे वातावरण में हर तरफ मन को मोह लेने वाली एक भीनी सुगंध हवा के संग बहने लगी है। प्रधानतः इसका उपयोग पाक रंधन प्रक्रिया में गरम मसाले के रूप में किया जाता है। परन्तु मसाला के अलावा भी यह एक बहुत ही लाभदायक एवं फायदा देने वाली सामग्री है जिसे प्राचीन समय में आयुर्वेद शास्त्र ने इसके औषधि गुणों से विश्व को परिचय करवाया। आज के अत्याधुनिक वैज्ञानिक समय पर भी लौंग के महत्व को नकारा नहीं जा सकता बल्की इस समय और अधिक उपयोग में लाकर इसके फायदे से सभी लाभान्वित हो रहें हैं।

यह छोटा कील जैसा दिखने वाला,असल में पेड़ पर उगने वाले फूल की कली है। वानस्पतिक विज्ञान में इसका नाम है सिज़ीगियम एरोमैटिकम(syzygium aromaticum) है एवं यह मायर्टेसी (myrtaceae) परिवार से ताल्लुक रखता है जिसमे सभी सुगंधित पेड़ पौधें मौजूद हैं। नीलगिरी (eucalyptus), केबाबचिनी (allspice), अमरूद (guava) इत्यादि पेड़ यह मायर्टेसी (myrtaceae) परिवार से जुड़े हैं।

पेड़ में आयीं हुई कलियों को खिलने से पूर्व ही तोड़ लिया जाता है एवं सूखने के बाद जो प्राप्त होता है वही लौंग है।

एक लौंग के विभिन्न नाम

भारत के विभिन्न अँचलों के प्रान्तों में भाषा बदल जाया करती है जिससे एक ही वस्तु के कई सारे नाम पड़ जाया करते है। उदाहरण के लिए यहाँ पर कुछ प्रचलित नाम के विवरण दिए गए हैं।

  • संस्कृत- लवङ्ग
  • हिंदी- लौंग
  • मराठी- लवंग
  • गुजराती-लवींग
  • बंगला- लबंग
  • मलयालम- लौंग
  • तेलगु- लवंगमु
  • तमिल-किरम्पु
  • इंग्लिश- क्लोव

इन देशों में उगाया जाता है लौंग।

विश्व में लगभग सभी उष्णकटिबंधी देशों में इसेके पौधों को उगाया जाता है। यह मलय देश के (इंडोनेशिया) उत्तरीय द्वीप अंचल मोल्लुका का स्वदेशी पौधा है। पूर्व अफ्रीका में ज़ांज़ीबार, श्रीलंका, मलेशिया, मेडागास्कर, एवं भारत में इसकी अधिक पैदावार है। इसके पौधे लगभग 12 मीटर ऊँचाई तक बढ़ते है। लगभग 6 से 7 साल के बाद फूल आने लगते हैं एवं निरंतर अस्सी साल तक यह वृक्ष में कलियाँ आती रहती है। इसके पश्चात पैदावार कम होकर बहुत कम हो जाती है।

खुश्बू का राज़

एक छोटी सा लौंग अपनी खुसबू के द्वारा खाद्य व्यंजन के साथ रसोई घर को भी महकाने लगता है। यह खुशबू इतनी प्रभावशाली है कि खाद्य व्यंजन को सेवन करने पर उसकी महक हमारे सांसों को भी तरोताज़ा कर देती है। यह खुशबू का राज़ है लौंग में मौजूद यूजेनॉल (Eugenol) पदार्थ जो लगभग 70% से 80 %  प्रतिशत इसके तेल में मौजूद रहता है।

पोषण के कारक

विटामिन- विटामिन ए, सी, इ, के, फोलेट, राइबोफ्लेविन, नियासिन, पैंटोथेनिक एसिड।

खनिज-कॉपर, सोडियम, पोटासियम, आयरन, मैग्नीशियम, मैंगनीज, सेलेनियम, फ़ास्फ़रोस, जिंक, कैल्शियम।

इससे मिलने वाले लाभ

  • लौंग मौखिक स्वास्थ्य को स्वस्थ रखने में कारगर है।
  • पेट में कीड़ा होने पर इसका सेवन करने से राहत मिलती है।
  • यह अजीर्ण रोग को दूर करने में सहायक है। अरुचि से छुटकारा दिलाकर रुचि को बढ़ाता है।
  • इसके सेवन से पसीने की दुर्गंध से छुटकारा मिलता है।
  • लौंग को पीसकर, लौंग का तेल दाँत एवं मसूड़े पर लेप लगाने से दर्द से मुक्ति मिलता है।
  • शिर दर्द होने पर लौंग को गर्म पानी में उबालकर भाँप लेने से दर्द से जल्द ही छुटकारा मिलता है।
  • सर्दी जुकाम होने पर 10 से 12 लौंग को लगभग 100 ml पानी में डालकर उबालना है। पानी आधा हो जाने पर वह गरम पानी को पीने से खाँसी, नाक बहना, छींक आना इत्यादि जैसी परेशानियों से मुक्ति मिलती है।
  • इसके नियमित सेवन से स्वर नली एवं स्वास नली स्वस्थ रहती है।
  • दिल के स्वास्थ्य को मजबूती देता है।
  • पेट में हुए संक्रमण को रोकने में कारगर है।
  • लौंग वीर्यवर्धक है अतः इसके सेवन से यौन सास्थ्य को मजबूती मिलती है।
  • इसके नियमित सेवन से शरीर में रोग प्रतिरोधक क्षमता में वृद्धि होती है।

रंधन पाक प्रक्रिया में उपयोग

  • गरम मसाले में इसका महत्वपूर्ण योगदान है। किसी भी प्रकार के भोजन में सुगंध तथा स्वाद लाने हेतु इसका उपयोग करना आवश्यक है।
  • भारतीय भोजन रंधन शैली में इसे मिठाई एवं बिरयानी, पुलाव अथवा मांसाहारी भोजन तैयार करने के लिए मुख्य रूप से उपयोग में लाया जाता है।
  • देश एवं विदेशों में बेकरी के व्यंजनों में सुगंध तथा स्वाद लाने के लिए इसका खूब उपयोग होता है।
  • पश्चिम बंगाल रंधन पाक शैली में इसके नाम से एक खास मिठाई बनाई जाती है जिसका नाम है ‘लबंग लतिका’।

FAQ

Q.रात को लौंग खाने से क्या फायदा?

Ans:- भोजन के बाद रात को सोने से पहले एक लौंग का सेवन करना अत्यंत लाभकारी है। इसका रस दांत एवं मसूड़ों को संक्रमण रहीत रखने में सहायक है। इससे मौखिक स्वास्थ्य हमेशा ठीक रहता है। मुँह के अंदर खराब बैक्टीरिया आदि को खत्म करता है। गले की खराश को दूर करता है। सांसों में अगले दिन सुबह तक ताज़गी बनाये रखने में सहायक है। चयापचय को मजबूती देकर हजम तंत्र को दुरुस्त करता है। अतिरिक्त अम्लता को कम करता है जिससे वायु विकार, पेट दर्द, कोष्ठ काठिन्य अथवा अनियमित दस्त, मूत्र दोष अथवा मूत्र से जलन, पेट की जलन आदि से छुटकारा दिलाता है।

Q.चेहरे पर लौंग लगाने से क्या होता है?

Ans: लौंग को पानी में उबालकर अथवा लौंग चूर्ण एवं पानी से लेप बनाकर चेहरे और लगाने से त्वचा को उज्ज्वलता प्राप्त होती है। चेहरे के त्वचा को लचीली तथा जवान बनाने में सहायक है। संक्रमण से हुए दाग या धब्बे को हल्का करने में भी सहायक है।

Q.लौंग का तेल लगाने से क्या होता है?

Ans: लौंग का तेल औषधीय गुण सम्पन्न है। यह तेल को उचित मात्रा में उपयोग करने से त्वचा की कोशिकाओं को पुष्टि प्राप्त होती है एवं त्वचा का स्वास्थ्य सुधरने लगता है। त्वचा उज्जवल, कोमल, सुगंधित,तथा जवान होने लगती है। बैक्टीरिया, फंगल आदि से संक्रमित त्वचा को ठीक करने के लिए यह तेल कारगर है। साधारणतः यह तेल का उपयोग कभी भी किया जा सकता है परन्तु कोई ख़ास चर्म रोग या संक्रमण को ठीक करने हेतु निजी चिकित्सक का परामर्श अवश्य लें एवं इसके गुणों का लाभ उठाएं।

Q.सरसों का तेल और लौंग से क्या होता है?

Ans सरसों का तेल एक तीव्र एवं तेज गंधयुक्त युक्त तेल है तथा इसके अपने ही बहुत गुण मौजूद है। प्रधानतः यह एक भोज्य तेल होने के साथ प्रसाधनी के तौर पर भी इसका उपयोग किया जाता है। यह तेल को सर के बालों में एवं बदन पर मालिश हेतु भी खूब उपयोग में लाया जाता है। इसलिए इस तेल के गुण का सामंजस्य रखते हुए लौंग को मिला देने पर अधिक लाभकारी सिद्ध हो सकता है। लौंग की सुगंध सरसों तेल को सुबासित करती है तथा लौंग का तेल सरसों तेल में मिलकर त्वचा, बाल इत्यादि को लाभ देने लगता है।

Q.तिल का तेल और लौंग से क्या फायदा होता है?

Ans: तिल के तेल में लौंग को मिलाने पर तेल सुगंधित होता है। तिल का तेल लौंग से मिलकर उसके गुणकारी तत्वों को समाहित कर लेता है। जिससे तील का तेल स्वत ही अधिक गुणकारी हो जाता है। यह तेल से भोज्य सामग्रियों को भी तैयार किया जा सकता है अथवा प्रसाधनी के तौर पर भी लाभकारी है। यह तेल सेवन के लिए एवं शरीर पर लगाने के लिए सर्वोत्तम है।

Q.लोंग का फूल खाने से क्या होता है?

Ans:- लौंग का फूल ही लौंग है साधारणतः जो हम देखते हैं। लौंग फूल न होकर फूल की कली है।
इसका सेवन करने से त्वचा, बाल, स्वास नली, पाचन तंत्र, हजम तंत्र, रक्त, प्रजनन अंग का स्वास्थ्य स्वस्थ रहता है।

Q.लौंग का पानी पीने से क्या होता है?

Ans: लौंग के पानी का नियमित उचित मात्रा में सेवन करने से हजम क्रिया एवं पाचन तंत्र स्वस्थ रूप से काम करता है। पेट दर्द, पेट में कीड़ा, अधिक अम्लता, गैस, दांत दर्द, मसूड़े से खून बहना जैसे परेशानियों से बचाता है।

Q.दूध में लौंग डालकर पीने से क्या फायदा होता है?

Ans: दूध में लौंग डालने से दूध सुगंधित होकर सेवन के लिए और अधिक उपयुक्त हो जाता है। अक्सर बच्चों को दूध की महक पसंद नही आती हैं, जिसके लिए वे दूध पीने से बचते हैं। परन्तु लौंग की खुश्बू से यह दिक्कत दूर हो सकती है। लौंग में हजम कराने की क्षमता मौजूद है, इसलिए यह दूध को सहजपाच्य कर देता है जिससे वायु विकार जैसी दिक्कतों से छुटकारा मिल सकता है।
लौंग के अन्य सभी गुण भी दूध में शामिल होकर दूध को और पुष्टि प्रदान करता है।

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